DIABETES से पीड़ित बुजुर्गो को FRACTURE का खतरा ज्यादा
एक रिसर्च के मुताबिक, टाइप-2 DIABETES वाले उम्रदराज लोगों और बुजुर्गो की कॉर्टिकल हड्डी कमजोर हो जाती है, जिससे उन्हें FRACTURE होने का खतरा बढ़ जाता है। हड्डी की घनी बाहरी परत को कॉर्टिकल कहते हैं, जो अंदरूनी भाग की रक्षा करती है। टाइप-2 DIABETES से वृद्धों की इस हड्डी की बनावट बदल सकती है और FRACTURE का जोखिम पैदा हो सकता है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने कहा कि टाइप-2 DIABETES एक गंभीर पब्लिक हैल्थ समस्या है। बुजुर्गो की आबादी बढ़ने के साथ साथ यह समस्या भी बढते जाने की संभावना है।
DIABETES से पीड़ित बुजुर्गो को FRACTURE का खतरा ज्यादा (The elderly
suffering from diabetes is more prone to fracture)
1. खराब आदतें हैं वजह (Bad habits are the reason)
मधुमेह वाले अधिकांश लोग टाइप-2 DIABETES वाले हैं। इसके रोगियों में इंसुलिन तो बनता है, लेकिन कोशिकाएं इसका इस्तेमाल नहीं कर पाती हैं। इसी को इंसुलिन प्रतिरोध कहा जाता है। आईएमए के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल ने कहा, 'टाइप-2 DIABETES आमतौर पर खाने-पीने की खराब आदतों, मोटापे और शारीरिक कसरत न करने की वजह से उत्पन्न होती है। चूंकि शरीर ग्लूकोज को कोशिकाओं तक पहुंचाने में इंसुलिन का प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं कर पाता, इसलिए यह ऊतकों, मांसपेशियों और अंगों में वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भर करता है। यह एक चेन रिएक्शन की तरह होती है और कई लक्षणों के साथ बढ़ती जाती है।'
डॉ. अग्रवाल ने कहा, 'टाइप-2 DIABETES समय के साथ धीरे-धीरे विकसित होती जाती है और शुरुआत में इसके लक्षण बहुत हल्के फुल्के होते हैं। जीवनशैली के मुद्दों के अलावा, ऐसे अन्य कारक भी हैं जो इस विकार के विकास में योगदान कर सकते हैं। कुछ लोगों के लीवर में बहुत अधिक ग्लूकोज पैदा होता है। कुछ लोगों में टाइप-2 DIABETES की आनुवांशिक स्थिति भी हो सकती है। मोटापा इंसुलिन प्रतिरोध के खतरे को बढ़ाता है।'
2. क्या है लक्षण (What is the
symptoms)
उन्होंने कहा कि टाइप-2 DIABETES के शुरुआती लक्षणों में प्रमुख हैं- लगातार भूख लगते रहना, ऊर्जा की कमी, थकान, वजन घटना, अत्यधिक प्यास लगना, बार बार मूत्र करना, मुंह सूख जाना, त्वचा में खुजली और दृष्टि धुंधलाना। चीनी के स्तर में वृद्धि से यीस्ट का संक्रमण हो सकता है, घाव भरने में ज्यादा समय लगता है, त्वचा पर काले पैच पड़ जाते हैं, पैर में तकलीफ और हाथों में सुन्नपन पैदा हो सकती है।
3. इन आहारों का करें सेवन (Eat these foods)
डॉ. अग्रवाल ने कहा, 'पत्तेदार सब्जियां, ताजे फल, साबुत अनाज, मछली और बादाम जैसे नट्स के साथ स्वस्थ आहार लेने से, टाइप-2 DIABETES के मरीज में जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। सस्ते, कैलोरी से भरे, कम पोषक तत्वों वाले भोजन की अधिकता से टाइप-2 DIABETES की दुनिया भर में बढ़त जारी है। सब्जियां, ताजे फल, साबुत अनाज और असंतृप्त वसा से इस रोग का खतरा कम होता है, इसलिए जरूरत इस बात की है कि इन चीजों को किफायती दरों पर आसानी से अधिकाधिक उपलब्ध कराया जाए।'
4. DIABETES के प्रबंधन
में मदद कर के कुछ टिप्स (Some Tips to
Help With the Diabetes Management)
अपने आहार में फाइबर और स्वस्थ कार्बोहाइड्रेट से युक्त खाद्य पदार्थो को शामिल करें। फल, सब्जियां और साबुत अनाज खाने से रक्त शर्करा का स्तर स्थिर रहने में मदद मिलेगी।
नियमित अंतराल पर खाएं और भूख लगने पर ही खाएं।
अपना वजन नियंत्रित रखें और अपना दिल स्वस्थ रखें। इसका मतलब है कि रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, मिठाई और एनीमल फैट कम से कम खाएं।
अपने दिल को स्वस्थ बनाए रखने में मदद के लिए रोजाना आधा घंटा तक एरोबिक व्यायाम करें। व्यायाम भी रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मदद करता है।

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