Diabetes में सिरदर्द को ठीक करने के उपाय :- DIABETES को साइलेंट किलर माना जाता है। यह बीमारी धीरे-धीरे शरीर को खोखला कर देती है। इसके साथ ही यह कई अन्य बीमारियों की भी वजह बनती है। DIABETES में सिरदर्द भी एक आम समस्या है।
DIABETES रोगी सिरदर्द के इलाज के लिए कुछ घरेलू उपाय अपना सकते हैं। संतुलित लाइफस्टाइल अपनाकर और उचित इलाज करवाकर इसे कंट्रोल करना चाहिए। सिरदर्द को हल्के में लेना आगे जाकर भारी परेशानियों की वजह बन सकती है।
DIABETES में सिरदर्द के कई कारण हो सकते हैं। थोड़े समय तक या हल्का सिरदर्द तो किसी को भी हो सकता है। लेकिन अगर सिरदर्द बार-बार होता है, तो इससे निजात पाने के लिए कुछ आसान से तरीके अपनाए जा सकते है।
1. भाप (Steam)
2. सिकाई
(Sikai)
3. नासिका की सफाई (Cleaning of nostrils)
4. संतुलित आहार लें (Have a balanced
diet)
कुछ आसान से योगासन अपनाकर भी सिरदर्द
से निजात पा सकते है।( You can get rid of
headache by adopting Yogas with ease.)
1. ध्यान (Care)
2. योग मुद्रा (Yoga money)
3. चन्द्रभेदी प्राणायाम (Chandrabhedi pranayama)
4. पवनमुक्त आसन (Pawan Mukta Asana)
5. वज्रासन (Vajrasana)
6. शवासन (Respiration)
एक बर्तन या स्टीमर में पानी लेकर उबलने तक गर्म करे। जब पानी उबलने लगे तो डॉक्टर द्वारा बताई गई दवा उचित मात्रा में डालकर, पंखे व कूलर बंद कर कपड़ा ढककर नाक व मुंह से लंबे-लंबे सांस आठ से दस मिनट तक लें। इसके बाद बीस मिनट तक हवा में न जाएं। इससे आपको सिरदर्द में आराम मिलेगा और नासिका भी साफ रहेगी।
गर्म कपड़ा या फिर गर्म पानी की बोतल गालों पर रखकर सिकाई करें। यह प्रक्रिया दिन में तीन बार लगभग एक मिनट के लिए करें। इससे काफी आराम मिलेगा।
नासिका की सफाई करने से भी सिरदर्द में आराम मिलता है। नाक की झिल्ली पर अनेक प्रकार के वायरस, बैक्टीरियां, फफूंदी, धूल-मिट्टी के कण, एलर्जी करने वाले कण व धुएं आदि के कण होते हैं, जिनको साफ करने से सिरदर्द को रोका जा सकता है।
डाइबिटीज के मरीजों के लिए संतुलित आहार बहुत जरूरी है। पहले तो यह समझना चाहिए कि किन कारणों से ऐसा हो रहा है। उसके ही अनुसार अपने आहार को संतुलित कर लेना चाहिए। अगर किसी को खाद्य पदार्थो से एलर्जी के कारण सिरदर्द को रहा है, तो उसे उन फलों-सब्जियों और अनाज से बचना चाहिए।
इस आसन में सबसे पहले पद्मासन की मुद्रा में बैठें। दोनों हाथ ज्ञान मुद्रा में रखें। आंखें बंद, गर्दन बिल्कुल सीधी रखें। चित्त बिल्कुल शांत करें और श्वास, प्रश्वास और प्रश्वसन आसन में बैठ जाएं।
दोनों पैरों को एक-दूसरे के ऊपर रखकर पद्मासन की मुद्रा में आ जाएं। दोनों हाथों को पीछे ले जाकर कलाइयां पकड़ लें। उसके बाद धीरे-धीरे कमर को आगे की ओर झुकाते हुए अपनी ठोड़ी को जमीन पर लगाने की कोशिश करें।
पद्मासन में बैठें। गर्दन, कमर बिल्कुल सीधी रखें। दायें हाथ के अंगूठे से दाहिनी नाक को बंद करें। फिर नाक के बाएं छिद्र से सांस भरें और दाएं हाथ की उंगलियों से नाक को बंद करते हुए दाईं और से श्वास बाहर निकालें। इस प्राणायाम को 12-15 बार करें।
सबसे पहले पीठ के बल लेट जाइए। उसके बाद दायीं टांग को घुटनों से मोड़ते हुए अपनी छाती से लगाने का प्रयास करें। दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में मिला लें और ठोड़ी को घुटनों से मिलाने की कोशिश करें। बायीं टांग जमीन पर सीधी रहेगी। कुछ देर इसी मुद्रा में रहें। इसी प्रकार इस आसन को बायीं टांग से करें। इस आसन को कम से कम पांच बार दोहराएं।
घुटनों को मोड़कर अपने शरीर का पूरा भार अपने दोनों पैरों की एडिय़ों पर रखकर बैठ जाएं। दोनों पैरों के पंजे आपस में मिले हों और दोनों एडिय़ां आपस में जुड़ी नहीं हों। दोनों हाथ घुटनों पर रखें। गर्दन, कमर और कंधे बिल्कुल सीधे और आंखें खुली रखें। इस आसन में कम-से-कम पांच मिनट तक बैठें।
इसमें पीठ के बल लेट जाएं। दोनों पैरों के बीच एक से दो फुट का फासला रखें। दोनों हाथ जांघों के पास और दोनों हथेलियां ऊपर की ओर हों। इस आसन में हम अपने पूरे शरीर को आराम देते हैं और अपना सारा ध्यान सांस लेने और छोडऩे में लगाते हैं।
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