Head injury के बारे में Learn



Head injury के बारे में Learn :- कहते हैं, HEAD मे लगी INJURY बेहद ही खतरनाक होती है। HEAD में INJURY लगने पर कुछ खास बातों पर ध्यान देना बेहद आवश्यक हो जाता है। HEAD में लगी INJURY दो तरीके की हो सकती है, HEAD के बाहरी हिस्से में या HEAD के आंतरिक हिस्से में। खुश्किस्मती से बचपन में लगी किसी भी प्रकार की INJURY सिर्फ हमारे HEAD के बाहरी हिस्से को प्रभावित करती है और यह उतनी हानिकारक नहीं होती है। HEAD के आंतरिक हिस्से में लगी INJURY, इस INJURY की तुलना में कहीं ज़्यादा हानिकारक होती है HEAD के बाहरी हिस्से में रक्त वाहिनीयां फैली होती हैं और इस कारण से HEAD में लगी हल्की INJURY से भी तुरन्त रक्तस्राव होने लगता है।


Head injury के बारे में Learn (Learn about injury in the head)





 

1. कुछ स्थितियां जिनमें डाक्टर को सम्पर्क करना ज़रूरी होता है (Some situations in which the doctor needs to be contacted)



अगर आपका बच्चा छोटा है और INJURY लगने के बाद उसे होश नहीं आता।


बच्चा किसी भी उम्र का है और वह कुछ इस प्रकार के लक्षण दर्शाता है जैसे वो रोता ही रहता है और चुप नहीं होता, उसे अकHEAD HEADदर्द और गर्दन दर्द होता है, सही तरीके से नहीं चल पाता।


बच्चा बहुत छोटा नहीं है और वो INJURY लगने के बाद भी ठीक तरीके से बर्ताव करता है फिर भी INJURY लगी हुई जगह पर हर 20 मिनट पर आइस पैक और कोल्ड पैक लगाएं। आइस को हमेशा किसी साफ कपड़े पर लपेट कर लगाएं।


किसी भी प्रकार की INJURY लगने के बाद 24 घंटे तक बच्चे का ध्यान दें और अगर खून नहीं रूक रहा है या कोई भी परेशानी है तो तुरंत डाक्टर से सम्पर्क करें।


अगर सोने से पहले आपके बच्चे को INJURY लगी है और INJURY लगने के बाद वो सो जाता है तो आप कुछ घंटों तक उसकी सांस देखते रहें। उसे नींद से ना जगाएं।


HEAD के आंतरिक हिस्से में लगी INJURY खोपड़ी के अन्दर की रक्त वाहिनियों को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं जिससे हमारी जान को भी खतरा हो सकता है। हमारा दिमाग सेरेब्रोस्पाइनल फ्लुइड से भरा होता है लेकिन HEAD पर लगी तेज़ INJURY HEAD के आन्तरिक हिस्सों को भी नुकसान पहुंचा सकती है।



2.  कुछ चिन्ताजनक लक्षण (Some anxious symptoms)


 INJURY लगने के बाद अचेत हो जाना।


सांस का ठीक प्रकार से ना चलना।


नाक कान या मुंह से लगातार खून आना।


बोलने या देखने में होने वाली परेशानी।


गर्दन में दर्द


2
से 3 बार उल्टियां होना। 


ऐसी स्थति में अगर आपके बच्चे को गर्दन या स्पाइन में INJURY आयी है तो उसे हिलाने की कोशिश ना करें बल्कि दूसरों की मदद लें। अगर बच्चा उल्टियां करता है तो उसके HEAD और गर्दन को सीधा ही रखें। खून बहने की स्थिति में विसंक्रमित बैंडएड का प्रयोग करें और अगर सूजन है तो आइस पैक लगायें।

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